जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक कौन से हैं – भूगोल

जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक विश्व में जनसंख्या का वितरण असमान है। अव्यवस्थित जनसंख्या वितरण के पीछे वे कौन से कारक हैं जो जनसंख्या के सामान वितरण के लिए बाधक है। इस पर हमें विचार करना चाहिए। यहाँ हमें यह जानकर अत्यंत आश्चर्य होगा की विश्व के अनेकों देशों की जनसंख्या के बराबर जनसंख्या केवल भारत एवं चीन में निवासरत् है। यहाँ यह भी जानना आवश्यक प्रतित होता है कि 29% थलमण्डल को 100% मानकर हम देखें तो 33% भाग प्रायः मानवविहीन है। जनसंख्या वितरण को अनेक कारक प्रभावित करते हैं जिन्हें हम इस प्रकार बाँटकर अध्ययन को सुगम बना सकते हैं।

जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक –

जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-

  1. भौगोलिक कारक
  2. आर्थिक कारक
  3. सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारक ।
  4. भौतिक कारक

जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले भौगोलिक कारक –

(i) जल की उपलब्धता – विडाल डी ला ब्लास ने कहा भी है- “जल बड़ा ही निष्ठुर निर्णायक है वह अपने से दर किसी भी बस्ती को नहीं देता।” यह हम जानते हैं कि जल ही जीवन हैं। प्राचीन काल से लेकर सभ्यता का विकास और उद्भव जल प्राप्ति स्थलों (नदियों) के पास रहे हैं। नील नदी को मिश्र की देन भी कहा जाता है। रोटी, कपड़ा और मकान ये द्वितीयक आवश्यकतायें हो सकती हैं पर प्राकृतिक प्रदत्त हवा एवं पानी मूलभूत आवश्यकता है। वर्तमान भौतिकवादी युग में कहाँ जाता है कि अगली लड़ाई तृतीय विश्व युद्ध अगर होता है तो वह जल के लिए होगा। इससे आप समझ सकते हैं जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने में जल की उपलब्धता का कितना महत्व है।

(ii) भू-आकृति – भूमि की प्रकृति का भी जनसंख्या के वितरण पर अधिक प्रभाव पड़ता है। यह बात इसी से – सिद्ध हो जाती है कि सम्पूर्ण विश्व की जनसंख्या का 1/10 भाग ही उच्च पर्वतीय व पठारी भागों में निवास करता है। मैदानों में जीवन निर्वाह की सुविधाएँ सबसे अधिक पायी जाती हैं। विस्तृत भू-तल सपाट होने के कारण आवागमन के मार्गों की सुगमता और कृषि, पशुपालन तथा औद्योगिक सुविधाओं के कारण मैदानों में निवास जनसंख्या का जमाव घना होता है। यही कारण है कि प्राचीन काल से नदियों के मैदानों में जनसंख्या अधिक पायी जा रही हैं। विश्व की 90% प्रतिशत जनसंख्या एवं प्रायः सभी बड़े-बड़े नगर, औद्योगिक और व्यापारिक केन्द्र, जो वास्तव में घनी जनसंख्यों के जमाव हैं, मैदान में स्थित हैं। विश्व के बहुत ही थोड़े नगर पहाड़ी भागों में बसे हैं। अतः हिमालय, आल्पस, रॉकी, एण्डीज पर्वत अथवा मध्य एशिया के पहाड़ी भाग प्राय: मानव से शून्य हैं, जबकि गंगा यांग्टिसीक्यांग, राइन और सेण्टलारेंस के मैदान मानव-आवास से परिपूर्ण हैं। पर्वत एवं ऊँचे भागों में न तो खेती-बाड़ी अधिक हो सकती है, न ही उद्योग-धन्धों को उन्नति हो सकती हैं और न मार्गों की ही सुविधा है। इसी कारण ऐसे प्रदेशों में जनसंख्या घनी नहीं होती।

(iii) जलवायु – जनसंख्या के वितरण पर जलवायु का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। मनुष्य उन्हीं भागों में रहना पसन्द करता है की जलवायु उसके स्वास्थ्य तथा उद्योग के लिए अनुकूल होती है। यही कारण है कि सबसे पहले मानव का विकास कर्क रेखा और 40° उत्तरी अक्षांशों के बीच के भागों में हुआ जो न तो अधिक गरम हैं और न अधिक ठण्डे हैं, जहाँ न ही अधिक वर्षा होती है और न ही सूखा पड़ता है तथा कार्य करने के लिए तापमान सदैव ही उपयुक्त रहा करता है, किन्तु इसके विपरित उष्ण कटिबंधीय वनों (अमेजन तथा कांगों नदी के बेसिनों आदि) में तीव्र गर्मी और सदा वर्षा होने के कारण प्रति वर्ग किमी. में 5 से भी कम मनुष्य निवास करते हैं। आर्कटिक अथवा अण्टार्कटिक महाद्वीप में तो अत्यधिक शीत के कारण प्रति वर्ग किमी. में से भी कम मनुष्य रहते हैं। ये प्रदेश असहनीय आर्द्र व उष्ण जलवायु अथवा कठोर शीत के कारण मानव बसाव के लिए सर्वथा अनुपयुक्त रहे हैं। इराक व मिस्र का प्रदेश, सिन्धु और गंगा का मैदान शताब्दियों से उत्तम जलवायु के कारण हो घना बसा है। इसी प्रकार शीतोष्ण सामुद्रिक जलवायु वाले प्रदेश (उत्तर-पश्चिमी यूरोप, उत्तरी संयुक्त राज्य अमेरिका) अपनी उत्तम जलवायु के कारण ही वहाँ के निवासियों की कार्यशीलता और मस्तिष्क पर बड़ा अनुकूल प्रभाव डालते हैं। अतः ये विश्व के सबसे घने बसे भागों में गिने जाते हैं।

(iv) मृदा ( मिट्टी ) – भूमि की उर्वरा शक्ति भी किसी स्थान विशेष पर जनसंख्या को आकर्षित करती है। जिन भागों में भूमि उपजाऊँ होती है, वहाँ मनुष्य सघन कृषि एवं विकसित पशुपालन करके अपना जीवन-निर्वाह करते हैं। कृषि के द्वारा थोड़े ही परिश्रम से सफलतापूर्वक जीवन निर्वाह हो सकता है। जितनी भूमि एक गाय के निर्वाह के लिए आवश्यक है उतनी भूमि पर अन्न उत्पन्न करने से 8 मनुष्यों का पालन हो सकता है एवं एक या दो पशु पाले जा सकते हैं। इस प्रकार भूमि की उर्वरा शक्ति का जनसंख्या के वितरण पर सीधा प्रभाव पड़ता है। किसान का अपनी भूमि से इतना निकट का संबंध होता है कि वह अपनी भूमि को छोड़कर अन्यत्र नहीं जा सकता।

जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले आर्थिक कारक –

(i) खनन एवं उद्योग – किसी स्थान पर पाये वाले खनिज पदार्थों अथवा शक्ति के साधनों के कारण भी वहाँ जनसंख्या का शीघ्र जमाव हो सकता है। जिन भागों में खनिज पदार्थ विशेषकर कोयला, खनिज तेल, ताँबा, सीसा, जस्ता और लोहा मिलता है, वहाँ क्रमशः जनसंख्या का जमाव होता जाता है क्योंकि खानों में काम करने के लिए निकटवर्ती भागों से मनुष्य वहाँ आकर निवास करने लगते हैं। इन महत्वपूर्ण खनिजों की प्राप्ति के फलस्वरूप किसी स्थान पर कला-कौशल की भी उन्नति हो जाती है तथा सम्बंधित उद्योग-धन्धों का भी तेजी से विकास होने लगता है। एक कारखाने में जितने मूल्य का माल तैयार होता है, उतने मूल्य की पैदावार हजारों एकड़ जमीन पर भी कृषि अथवा अन्य प्राथमिक व्यवसाय से उत्पन्न नहीं की जा सकती।

(ii) आवागमन एवं संचार के साधनों की सुविधा – जीवन निर्वाह के साधनों की उपलब्धता और जलवायु के उपरान्त जनसंख्या के वितरण पर परिवहन की सुविधाओं का भी प्रभाव पड़ता है। मानव प्रगतिशील होने से एक स्थान पर बँधकर नहीं रह सकता। उसे प्रसार और समागम के लिए अच्छे मार्गों की आवश्यकता होती है। विश्व के अनेक क्षेत्र आर्थिक संसाधनों में धनी होते हुए भी परिवहन के मार्गों के अभाव में प्रायः जन शून्य रह गये हैं। विश्व के पहाड़ी प्रदेश, वन क्षेत्र, साइबेरिया का दक्षिणी भाग, ऑस्ट्रेलिया का मध्यवर्ती मैदान इस कारण भी कम घने बसे हैं, जबकि विश्व के सभी बड़े नगर या बन्दरगाह उन्नत मार्गों के केन्द्रों पर होने के कारण घने बसे हैं।

(iii) नगरीकरण – बेहतर नगर नियोजन एवं नगरीकरण से भी ग्रामीण जनता नगरों की ओर अग्रसर होती है तथा, उचित सुविधा प्राप्त होने पर वो जनसंख्या वृद्धि में सहयोग करती हैं।

जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारक –

जनसंख्या के घनत्व पर अनेक सामाजिक कारकों का भी प्रभाव पड़ता है। मानव के आर्थिक विकास पर जातीय गुण, धार्मिक विचारधाराएँ, सामाजिक परम्पराएँ तथा शासन प्रणालियाँ भी प्रभाव डालती है। जहाँ जीवन और सम्पत्ति की सुरक्षा हो, शक्तिशाली और न्यायपूर्ण शासन व्यवस्था हो, वहाँ जनसंख्या का जमाव अधिक होता है। मंगोलिया और मंचूरिया तथा भारत के पश्चिमी और पूर्वी सीमा के क्षेत्र जनसंख्या की दृष्टि से कम घने बसे हैं। मानव का सामाजिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण भी किसी स्थान पर जनसंख्या को केन्द्रित करने अथवा बिखेरने में अधिक प्रभावी होता है पूर्वी एशियाई देशों में संयुक्त परिवार प्रणाली की प्रथा होने से अनेक परिवार एक साथ मिलकर एक ही स्थान पर रहते हैं। चीन में खेतों में पूर्वजों की कब्रें होने से चीनी लोग वहीं रहते हैं और कृषि क्षेत्र अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक घने बसे होते हैं।

अंतत आपको जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक कौन से हैं (Janasankhya Vitaran Ko Prabhaavit Karane Vaale Kaarak Kaun Se Hain) के बारे में समझ आ गया होगा, अगर आपको इसके बारे में किसी भी प्रकार का प्रश्न या सुझव है तो हमें कमेंट कर के जरुर शुचित करें, ताकि आपके प्रश्नों का जवाब और सुझाव दे सकें धन्यवाद!

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