व्यष्टि अर्थशास्त्र की परिभाषा, अर्थ, विशेषताएं, महत्व, सीमाएँ, | Vyasti Arthashastra 

व्यष्टि अर्थशास्त्र की परिभाषा

व्यष्टि अर्थशास्त्र की परिभाषा का एवं अर्थ (Meaning and Definition)व्यष्टि अर्थशास्त्र के अन्तर्गत वैयक्तिक इकाइयों जैसे- – व्यक्ति, परिवार, उत्पादक फर्म, उद्योग आदि का अध्ययन किया जाता है। व्यष्टि अर्थशास्त्र की इस रीति का प्रयोग किसी विशिष्ट वस्तु के कीमत निर्धारण, व्यक्तिगत उपभोक्ताओं तथा उत्पादकों के व्यवहार एवं आर्थिक नियोजन, व्यक्तिगत फर्म तथा उद्योग के संगठन आदि तथ्यों के अध्ययन हेतु किया जाता है। व्यष्टि अर्थशास्त्र की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं-

  1. प्रो. बोल्डिंग के अनुसार, “व्यष्टि अर्थशास्त्र विशिष्ट फर्मों, विशिष्ट परिवारों, वैयक्तिक कीमतों, मजदूरियों, आयों, विशिष्ट उद्योगों और विशिष्ट वस्तुओं का अध्ययन है ।”
  2. प्रो. चेम्बरलिन के शब्दों में, “व्यष्टि अर्थशास्त्र पूर्ण रूप से व्यक्तिगत व्याख्या पर आधारित है और इसका संबंध अंतर वैयक्तिक संबंधों से भी होता है।

व्यष्टि अर्थशास्त्र की विशेषताएँ (Characteristics of Micro Economics)

व्यष्टि अर्थशास्त्र की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. वैयक्तिक इकाइयों का अध्ययन — व्यष्टि अर्थशास्त्र की पहली विशेषता यह है कि यह वैयक्तिक इकाइयों का अध्ययन करती है। व्यष्टि अर्थशास्त्र वैयक्तिक आय, वैयक्तिक उत्पादन एवं वैयक्तिक उपभोग आदि की व्याख्या करने में सहायता करता है। यह प्रणाली अपना संबंध समूहों से न रखकर इकाइयों से रखती है।
  2. सूक्ष्म चरों का अध्ययन – सूक्ष्म अर्थशास्त्र की दूसरी विशेषता के रूप में यह छोटे-छोटे चरों का अध्ययन करती है। इन चरों का प्रभाव इतना कम होता है कि इनके परिवर्तनों का प्रभाव सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ता है।
  3. कीमत सिद्धांत व्यष्टि – अर्थशास्त्र को कीमत सिद्धान्त अथवा मूल्य सिद्धान्त के नाम से भी जाना जाता है। इसके अंतर्गत वस्तु की माँग एवं पूर्ति की घटनाओं का अध्ययन किया जाता है। इसके ही साथ माँग एवं पूर्ति के द्वारा विभिन्न वस्तुओं के व्यक्तिगत मूल्य निर्धारण भी किये जाते हैं।
  4. पूर्ण रोजगार की मान्यता – व्यष्टि अर्थशास्त्र का अध्ययन करते समय पूर्ण रोजगार की मान्यता को लेकर चला जाता है।

व्यष्टि अर्थशास्त्र का महत्व (Importance of micro Economics)

व्यष्टि अर्थशास्त्र का महत्व है-

  1. सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक – यदि हम सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के स्वरूप की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो, हमें व्यक्तिगत इकाइयों की जानकारी हासिल करना आवश्यक है, क्योंकि व्यक्तिगत माँग के संयोग से ही सामूहिक माँग एवं सामूहिक पूर्ति का रूप सामने आता है।
  2. आर्थिक समस्याओं के निर्णय में सहायक – व्यष्टि अर्थशास्त्र आर्थिक समस्याओं के निर्णय में सहायक होता है। आर्थिक समस्याओं में मूल्य का निर्धारण एवं वितरण की समस्या प्रमुख होती है। उत्पत्ति का प्रत्येक साधन अधिकाधिक पारिश्रमिक प्राप्त करना चाहता है। इन समस्त समस्याओं के निर्णय के लिए व्यष्टि अर्थशास्त्र उपयोगी रहा है।
  3. आर्थिक नीति के निर्धारण में सहायक- व्यष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत सरकार की आर्थिक नीतियों का अध्ययन इस आधार पर किया जाता के समाधान में उपयोगी। है कि उनका व्यक्तिगत इकाइयों के कार्यकरण पर कैसा प्रभाव पड़ता है। जैसे- हम इस बात का अध्ययन कर सकते हैं कि सरकार की नीतियों का विशिष्ट वस्तुओं की कीमतों और मजदूरी पर क्या प्रभाव पड़ता है तथा सरकार की नीतियाँ साधनों के वितरण को किस प्रकार प्रभावित करती हैं ?
  4. आर्थिक कल्याण की शर्तों का निरीक्षण- व्यष्टि अर्थशास्त्र में जहाँ व्यक्तिगत उपभोग, व्यक्तिगत रहन- सहन के स्तर आदि की जानकारी प्राप्त की जाती है, वहीं सार्वजनिक व्यय एवं सार्वजनिक आय के प्रभावों की भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
  5. व्यक्तिगत इकाइयों के आर्थिक निर्णय में सहायक – व्यष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत इकाइयों की समस्याओं पर उचित निर्णय लेने में सहायता प्रदान करता है। जैसे— प्रत्येक उपभोक्ता यह चाहता है कि वह अपने सीमित साधनों से अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करे तथा इसी प्रकार प्रत्येक उत्पादक भी यही चाहता है कि वह कम से कम उत्पादन लागत पर अधिकतम उत्पादन प्राप्त करे ।
  6. व्यक्तिगत इकाइयों की समस्याओं के समाधान में उपयोगी – व्यष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत इकाइयों की समस्याओं के समाधान में भी उपयोगी है। जहाँ एक ओर व्यष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत इकाइयों की समस्याओं का अध्ययन करता है, वहीं दूसरी ओर इन इकाइयों की समस्याओं का समाधान भी करता है ।

व्यष्टि अर्थशास्त्र की सीमाएँ (Limitations of Micro Economics) –

व्यष्टि अर्थशास्त्र की प्रमुख सीमाएँ, निम्नलिखित हैं-

  1. केवल व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन – व्यष्टि अर्थशास्त्र में केवल व्यक्तिगत इकाइयों का ही अध्ययन किया जाता है। इस प्रकार, इस विश्लेषण में राष्ट्रीय अथवा विश्वव्यापी अर्थव्यवस्था का सही-सही ज्ञान प्राप्त नहीं हो पाता। अतः व्यष्टि अर्थशास्त्र का अध्ययन एक पक्षीय होता है।
  2. अवास्तविक मान्यताएँ – व्यष्टि अर्थशास्त्र अवास्तविक मान्यताओं पर आधारित है, व्यष्टि अर्थशास्त्र केवल पूर्ण रोजगार वाली अर्थव्यवस्था में ही कार्य कर सकता है, इसी प्रकार व्यावहारिक जीवन में पूर्ण प्रतियोगिता के स्थान पर अपूर्ण प्रतियोगिता पायी जाती है।
  3. व्यष्टि निष्कर्ष, समग्र अर्थव्यवस्था के लिए अनुपयुक्त – व्यष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत इकाइयों के अध्ययन के आधार पर निर्णय लेता है । अनेक व्यक्तिगत निर्णयों को सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के लिए सही मान लेता है, लेकिन व्यवहार में कुछ धारणाएँ ऐसी होती हैं, जिन्हें समूहों पर लागू करने से निष्कर्ष गलत निकलता है।
  4. संकुचित अध्ययन – कुछ आर्थिक समस्याएँ ऐसी होती हैं, जिनका अध्ययन व्यष्टि अर्थशास्त्र में नहीं हो सकता है। उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय आय, रोजगार, राजकोषीय नीति, आय एवं धन का वितरण, विदेशी विनिमय, इत्यादि। यही कारण है कि आजकल समष्टि अर्थशास्त्र का महत्व बढ़ता जा रहा है।

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